अर्थव्यवस्था में मंदी की आलोचनाओं पर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को जवाब देते हुए कहा है कि अर्थव्यवस्था के सातों इंडीकेटर और आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर है और इसमें ग्रोथ के संकेत दिखने लगे हैं। उन्होंने कहा कि इस बात को सुनिश्चित किया जाएगा कि यहां से ग्रोथ में और तेजी लाई जाए। लोकसभा में जवाब देते हुए वित्तमंत्री ने कहा कि सातों इंडीकेटर अर्थव्यवस्था में तेजी आने की तरफ स्पष्ट रूप से इशारा करते हैं। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था मुश्किल में नहीं है। मौजूदा वित्त वर्ष में एफडीआई, एफपीआई और जीएसटी कलेक्शन में तेजी से अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर ग्लोबल सेंटीमेंट मजबूत
निर्मला सीतारमण ने कहा कि एफडीआई और एफपीआई में तेजी बताती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर ग्लोबल सेंटीमेंट मजबूत हैं। विदेशी निवेशकों का विश्वास भारत में बढ़ा है, इस कारण 2019-20 में अप्रैल-नवंबर के दौरान 24.4 अरब डॉलर की एफडीआई देश में आई जबकि साल 2018-19 की इसी अवधि के दौरान 21.2 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया था। वित्त मंत्री ने बताया कि इस दौरान एफपीआई 12.6 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले साल समान अवधि में 8.7 अरब डॉलर था।
जीएसटी कलेक्शन और पीएमआई इंडेक्स में भी तेजी
वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी कलेक्शन में बढ़ोतरी से कारोबारी गतिविधियों में तेजी के संकेत मिल रहे हैं। जनवरी में जीएसटी कलेक्शन 1.10 लाख करोड़ रुपए रहा। अप्रैल 2019 से जनवरी 2020 के दौरान 6 बार कलेक्शन एक लाख करोड़ रुपए के ऊपर रहा। पीएमआई मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स में बढ़ोतरी से भी औद्योगिक गतिविधियों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। दिसंबर में पीएमआई इंडेक्स 52.7 पर था जो जनवरी में बढ़कर 55.3 हो गया। यह पिछले आठ साल का उच्चतम स्तर है।
विदेशी मुद्रा भंडार में भी बढ़ोतरी
वित्त मंत्री ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार में भी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन प्रोजेक्ट देश के अंदर ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट में निवेश को आकर्षित करेगा। हाल ही में वित्तमंत्री ने बजट पेश किया था। इस समय अर्थव्यवस्था सुस्ती के साथ महंगाई की भी समस्या से भी जूझ रही है।